जौनपुर। भीजेपी की हुकूमत आने के बाद समाजवादी पार्टी के तेज तर्रार नेता सांसद आज़म खान पर दर्जनों फर्जी मुकदमा दर्ज होगया है जिनमें  मुर्गी चोरी तक के मुकदमा दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया गया। यहां तक कि उनकी विधायक पत्नी व विधायक बेटे को भी जेल भेज दिया गया। इसके बाद भी मुलायम सिंह, अखिलेश यादव के अतिरिक्त पूरी समाजवादी पार्टी खामोश है। दुःख की इस घड़ी में मुसलमान मुलायम सिंह और उनकी बिरादरी के समर्थन का इंतेज़ार कर रहा है। लेकिन सदन से लेकर सड़क तक समाजवादी कार्यकर्ताओं ने ख़ामोशी बना रखी है उनकी चुप्पी नही टूट रही है।ऐसा लगता है मुलायम सिंह और उनके लाडले बेटे अखिलेश यादव आज़म खान को किनारे कर के खुद को मुसलमानों का लीडर बनना चाह रहे हैं। उक्त बातें ईडेन पब्लिक स्कूल के मैनेजर व संस्थापक परवेज़ आलम भुट्टो ने प्रेस वार्ता में कहीं।उन्होंने कहा कि अब तक किसी यादव पर कोई छोटा सा मुकदमा भी दर्ज हुआ होता तो समाजवादी पार्टी के लोग पूरे प्रदेश में समाजवाद का खतरा बता कर जेल भरो आंदोलन का बिगुल बजा दिया होता। और उसमें भी मुसलमान सबसे ज़्यादा लाठी खाता हुआ दिखाई देता। पूर्व की अखिलेश सरकार में मुज़फ्फरनगर में पूरी तरह समाजवाद दिखाई दे चुका है।जहां पीड़ितों को अब तक इंसाफ़ नहीं मिल पाया है। सीएए, एन‌आरसी और एनपीआर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच अखिलेश यादव की बेटी पहुंचती है तो सीएम अखिलेश यादव सफाई देते हैं कि मेरी बेटी घंटाघर घूमने ग‌ई थीं। आजमगढ़ के लोगों ने यादव समाजवाद को गले लगाया और मोदी लहर में भी मुलायम सिंह और अखिलेश यादव को सांसद बनाकर अपना नेता चुना है। लेकिन जब शांतिपूर्ण तरीके से बिलरियागंज जनपद आज़मगढ़ में मुस्लिम समाज की महिलाओं पर पुलिसिया तांडव व बर्बरता के बाद भी पूरा समाजवाद खामोश रहा। जिस आज़म खां ने समाजवादी पार्टी को अपने खून वाले पसीने से सींचा था और खुद को पार्टी की नींव का ईंट मान रहे थे। वक्त पड़ने पर मुलायम सिंह और उनकी पूरी टीम ने आज़म खां को मुसलमान होने का एहसास करा दिया है। उन्होंने कहा कि जाति धर्म के नाम पर यादव समाज के लोग मौका पड़ने पर बीजेपी को अपना वोट देकर राजनीतिक फायदा उठा लेते हैं। मुसलमान यादव समाजवाद को ढोता रहता है।मुसलमानों को अपना राजनैतिक भविष्य तय करना होगा वर्ना 70 साल तो क्या 70 जन्मों तक राजनैतिक फायदा होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार अगर राजनैतिक विद्वेष में आज़म खान को निशाना बना रही है तो फिर किसी यादव नेता अखिलेश और मुलायम सिंह को क्यों नहीं? क्योंकि बीजेपी और समाजवादी पार्टी में कहीं न कहीं मैच फिक्सिंग का खेल तय है।आने वाले समय में यादव समाज वाद को इसका जवाब देना होगा।
इनपुट-अज़ीम सिद्दकी