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*किसी ने महिला को नायब रचना तो किसी ने गृहस्थ जीवन का मज़बूत पहिया बताया*



जौनपुर।  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानि 8 मार्च को दुनिया के सभी देश चाहे वह विकसित हो या विकासशील मिलकर महिला अधिकारों की बात करते हैं। इसी दिशा में उनके सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों के बारे में चर्चा की जाती है। और साथ ही साथ उनके तरक्की के विविध पहलुओं पर बातें होतीं हैं। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पूर्व संध्या पर तिलकधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष की अगुवाई में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें उपस्थित लोगों ने अपना-अपना विचार रखा। संगोष्ठी का आयोजन सृजन संस्था के तहत आयोजन किया गया।

आज भी स्त्रियां अभावों में जिन्दगी बीता रही है-डॉ0 सरोज सिंह

संगोष्ठी की अध्यक्षता टीडी महाविद्यालय के हिंदी विभाग की डॉ0 सरोज सिंह ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में महिला का गरिमामय स्थिति और सामाजिक विकास यात्रा में महिलाओं के योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिसको रेखांखित करते हुए उन्होंने शिक्षा पर प्रकाश डाला। राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ0 गीता यादव ने कहा कि भारत मे नारियों को मौलिक अधिकार, मतदान का अधिकार और शिक्षा का अधिकार तो प्राप्त है लेकिन आज भी स्त्रियां अभावों में जिन्दगी बीता रही है। महिलाएं खुद सुनिश्चत करें कि वह किसी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है। वह सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक आदि सभी कार्य करने में सक्षम है। सशक्तिकरण का मतलब सिर्फ शक्ति का अधिग्रहण ही नही अपितु अपनी शक्ति प्रयोग की क्षमता का विकास करना है।संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए डॉ0 सुषमा सिंह, श्रद्धा सिंह ने महिलाओं की दोहरी भूमिका का जिक्र करते हुए कर्तव्यनिष्ठा पर बल दिया। वही डॉ0 कनक सिंह ने महिला के सृजनात्मक शक्ति के महत्व को बताते हुए ईश्वर का नायाब रचना बताया। अंग्रेजी विभाग की डॉ0 छाया सिंह ने अपराजिता स्त्री की काव्य पाठ के माध्यम से अपना विचार व्यक्त की। डॉ0 माया सिंह ने स्त्री को ग्रहस्थ जीवन का मज़बूत पहिया बताया। अंत में डॉ0 रीता सिंह, डॉ0 शिखा श्रीवास्तव ने महिलाओं की परिवारिक भूमिका पर प्रकाश डाला। इस दौरान मुख्य रूप से डॉ0 राज देव दूबे, रुचिका उपस्थित रही।
इनपुट-सुरेश कुमार