जौनपुर।खूबसूरत राज्यों में अपनी अलग छाप छोड़ने तथा अपनी बेशुमार धरोहरों के कारण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले उत्तर प्रदेश  ऐतिहासिक शहर और प्राचीन धरोहऱो को अभी तक अपने में समेटे हुए है।यही तक नही  उत्तर प्रदेश में अनगिनत जगहें हैं जो कि अतीत में अपने गौरवशाली किलों, मंदिरों, मस्जिदों के रूप में स्मारकों की उपस्थिति से आज भी  पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। जब भी बात भारत के इतिहास की होती है, तो जौनपुर का नाम एक बार जरूर सामने आता है।


  • जिले के इतिहास के साथ अटाला मस्जिद के बारे में  रोचक जानकारी
अपनी बेशकीमती,लज़ीज़ इमरती, मूली व प्राचीन धरोहऱो की खान कहे जाने वाले इस शहर की स्थापना 14वीं शताब्दी में फिरोजशाह तुगलक ने अपने चचेरे भाई मोहम्मद बिन तुगलक उर्फ जूना खान के नाम पर करी थी। 1394 के आसपास मलिक सरवर ने जौनपुर को शर्की साम्राज्य के रूप में स्थापित किया था।वैसे तो जिले में काफी कुछ है आपके सामने बताने को लेकिन सिर्फ आज जिले के एक ऐसे मजीद के बारे में बताएंगे जो हूबहू मंदिर जैसा दिखता है। एक ऐसा मस्जिद है जिसकी निर्माण शैली एकदम मंदिर की भांति है। इसके पीछे फिरोजशाह तुगलक का हाथ है। 


  • फिरोजशाह तुगलक ने अपने शासन काल में मंदिर को मस्जिद में किया था रूपांतरित।

दरअसल, फिरोजशाह तुगलक इस्लाम को मानने वाला कट्टर धर्मांध व्यक्ति था जिसने अपने शासन काल में हर वह निर्णय लिया जिससे इस्लाम को मानने वाले लोग और सशक्त हो सके। उसने कई सारे मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था। जिसमें से एक था अटाला देवी मंदिर फिरोजशाह ने इस मंदिर को मस्जिद में रूपांतरित कर दिया। यही कारण है कि इस मस्जिद की रचना मंदिर से मिलती है।अटाला मस्जिद जौनपुर का एक प्रसिद्ध पर्यटन आकर्षण है, जो यहां के स्थानीय लोगो के साथ साथ पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय होने के साथ पर्यटकों को भी अपने और आकर्षित करता है। आपको बता दे इसकी आधारशिला 1377 में दिल्ली के सुल्तान फिरोज शाह तुगलक तृतीय के शासनकाल में रखी गई थी। मस्जिद परिसर में एक मदरसा भी मौजूद है। आज अटाला मस्जिद ,भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देखभाल में है इस मस्जिद का निर्माण 1408 में हुआ जिसका निर्माण यहां के शासक सुल्तान इब्राहिम शर्की ने कराया था।

तन्मय बरनवाल