जौनपुर। बेमिशाल, ऐतिहासिक धरोहरों के चमन कहे जाने वाले शिराजे हिंद कि ये सरजमी, तमाम रत्न अपने धरोहर व गौरवशाली इतिहास को बयां कर रहे है।
शायद आपको ये नही पता होगा कि उत्तरप्रदेश का ये शहर कभी  महर्षि यमदग्निपुरम की तपोस्थली हुआ करता था, इब्राहिम शाह शर्की के काल में स्वतंत्र राज्य होने के दरमियान यहा पर जौनपुर का शाही किला, लाल दरवाजा, महर्षि यमदग्नि तपोस्थल, अटाला मस्जिद, झंझरी मस्जिद,शाह का पंजा नाथुपुर का निर्माण कराया गया था। 
इसके अलावा शाही पुल, जयचन्द्र के किले का भग्नावशेष, सगरे का कोट सहित काफी ऐतिहासिक धरोहरे है। जिसमे से आज हम जिले के तमाम रत्नो में शुमार लाल दरवाजे का ज़िक्र करेंगे।
जौनपुर शहर के बाहरी इलाके में स्थित लाल दरवाजा मस्जिद या रूबी (लाल) गेट मस्जिद अपने आप में बेमिशाल है| जिसका निर्माण 1447 में सुल्तान महमूद शर्की की बेगम बीबी राजी ने करवाया  था। इसे खास तौर से बेगम के निजी प्रार्थना कक्ष के रूप में बनवाया गया था।
इस मस्जिद की वास्तुशिल्पीय शैली हूबहू अटाला मस्जिद से काफी मिलती है। हालांकि फर्क सिर्फ इतना है कि आकार के मामले में यह अटाला मस्जिद से छोटा है। इसके उत्तर, पूर्व और दक्षिण में तीन दरवाजे बनाये गए है, जिसके जरिए इसके अंदर पहुंचा जा सकता है।
इसका पूर्वी गेट लाल पत्थर से बना है। इतना ही नहीं यह मस्जिद रानी बीबी राजी के महल के लाल दरवाजे के बगल में ही है। यही वजह है कि इसे लाल दरवाजा मस्जिद कहा जाता है। साथ ही आप को बतलाते चले कि मस्जिद जौनपुर के एक मुस्लिम संत मौलाना सैय्यद अली दाऊद कुतुबुद्दीन को समर्पित है। इसे खास तौर से बेगम के निजी प्रार्थना कक्ष के रूप में बनवाया गया था।


-तन्मय बरनवाल