• ऐतिहासिक प्राचीनतम महाकाली  मंदिर
जौनपुर। जिले के सिंगरामऊ क्षेत्र के बाजार स्थित ऐतिहासिक प्राचीनतम महाकाली  मंदिर पर दूरदराज  से  आए भक्तों का आवागमन हमेशा रहता है। भक्तों पर माता का विशेष आशीर्वाद भी उसी भाति बना रहता है।

इस पवित्र  स्थान पर प्रत्येक मंगलवार के दिन श्रद्धालुओं का जमावड़ा मेले के रूप में रहता ही रहता है। वहीं नवरात्र के दिनों में श्रद्धालुओं काफी संख्या में यहां आते है। लोग आस्था से मत्था टेकने व मंदिर के दर्शन करने काफी दूर से सिंगरामऊ की इस पावन धरती पर आते हैं।
बता दे की राजा राय रणधीर सिंह ने इस प्राचीनतम सिद्ध पीठ महाकाली मंदिर का निर्माण कराया था। तभी से मां के चरणों में अर्पण से शुभ कार्यों की शुरुआत होने लगी। 

  • पौराणिक ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था अपने में समेटे हुए है महाकाली  मंदिर
प्राचीनतम सिद्ध पीठ महाकाली मंदिर लोगो की श्रद्धा विश्वास व आस्था का संगम है।वैसवंशीय क्षत्रिय शिरोमणि द्वारा वर्ष 1857 में इष्ट देवी के रूप में यहां स्थापित किया गया।

बहु विख्यात इस सिंगरामऊ की महाकाली  मंदिर ने पौराणिक ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था को अपने में समेटे हुए है। मंदिर की आधार शिला एवं मूर्ति प्रतिष्ठा सिंगरामऊ राजभवन के तात्कालिक शासक ने कराया था। यह काफी प्राचीनतम मंदिर है।

यहां प्रत्येक मंगलवार को विशाल मेला लगता है, जहां पर श्रद्धालु कढ़ाई चढ़ाकर प्रसाद बांटते है। तो वहीं क्षेत्र के लोग किसी भी  शुभ काम की शुरुआत करने सेे पहले माता के दरबार पर जरूर आते हैं मत्था टेक के उस कार्य का शुभारंभ करते हैं । 

  • श्रद्धा से शीश नवाकर यहां मन्नते मांगते लोग 

मंदिर की स्थापना के समय की मूर्ति बीते दिनों चोरी हो गई थी। सिंगरामऊ के रियासत द्वारा दूसरी मूर्ति स्थापित की गई। आज भी लोग पूरी श्रद्धा से शीश नवाकर मन्नते यहां मांगते हैं।

मां काली माता का मंदिर पूरे क्षेत्र के लिए आस्था का केंद्र बना है। मन से मांगि यहां हर मुराद अवश्य पूर्ण होती है। यह हम नहीं कह रहे हैं यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु और स्थानीय लोगों की मान्यता यही है।
इसी मंदिर परिसर में हर वर्ष कई जोड़ों का विवाह भी होता है। तो वहीं मंदिर परिसर के बाहर लगी दुकाने मंगलवार के दिन सबको बहुत आकर्षित करती।


तन्मय बरनवाल