• छठीं पुण्यतिथि पर माल्यार्पण करके लोगों ने दी श्रद्धांजलि

पंकज बिंद
जौनपुर। सीताराम यादव समाज के दर्पण थे। उन्होंने हमेशा समाज को परिवार समझा। उनके मन में गरीबों के लिये दर्द था। समय पर समझकर दूरदृष्टि से निर्णय लेना उनकी विशेषता थी। उन्होंने जीवन में बहुत संघर्ष किया। उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति थी। उनकी ललकार और हुंकार से कितनों की ही जिन्दगी में बदलाव आया। उनके विचारों व उनकी जीवनशैली से प्रेरणा लेकर जीवन में उन्हें कार्यान्वित करें।
मित्र बनाने और मैत्री निभाने में उनको दलों की दीवारें बांध नहीं पाती थी। उक्त बातें सीताराम यादव के छठीं पुण्यतिथि पर महराजगंज क्षेत्र के रमदेईया गांव में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कही। उन्होंने आगे कहा कि सीताराम जैसे सामाजिक व्यक्तियों की बहुत जरूरत है जो आम आदमी से जिरह करें, उन्हें एक व्यापक परिदृश्य दिखायें। उन्होंने एक प्रगतिशील, धर्मनिरपेक्ष और संसदीय लोकतंत्र के राजनीतिक भूगोल के बराबर अपनी असरदार उपस्थित बनाये रखीं।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश हायर एजुकेशन के सदस्य प्रो. आरएन त्रिपाठी ने कहा कि सीताराम जी प्रतिबद्ध लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष थे। वह एक दल में सक्रिय थे लेकिन उनके निजी रिश्ते में राजनीतिक धाराओं की कोई सीमा नहीं थी। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवायोजना के समन्यवक डा. राकेश यादव ने सीताराम जी को अपने शिष्टाचार और सरोकार के साथ लगातार निकटता बढ़ाते रहने वाला आचरण बताया। युवा सपा नेता विकास यादव ने कहा कि बाबू जी के व्यक्तित्व में एक प्रकार का चुम्बकीय प्रभाव था जिससे वह अपने पूरे जीवन भर मित्रों और प्रशंसकों का दायरा बढ़ाते चले गये थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक लाल बहादुर यादव व संचालन प्रो. लाल रत्नकर ने किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक उमाशंकर यादव, रामजनम यादव, राजाराम यादव, डा. उदयभान, डा. महावीर यादव, सुरेन्द्र यादव, धर्मेन्द्र यादव, मुनिराज, राम उजागिर, भोला यादव, वेदान्त, रामचन्दर, राजेन्द्र यादव, ओम प्रकाश मौर्य, राजनाथ यादव, रमापति यादव, रामजनक यादव, अजीत यादव, सन्दीप, विनोद सिंह, राजेश, पूर्व प्रधान महावीर, दिनेश यादव सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। अन्त में सीताराम के ज्येष्ठ पुत्र अजय यादव सपा नेता महाराष्ट्र ने समस्त आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।