जौनपुर। राजस्थान एवं पंजाब के कुछ क्षेत्रों में टिड्डी दल के प्रकोप के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश के राजस्थान एवं हरियाणा से सटे हुये जनपदों में टिड्डी दल के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गयी है। टिड्डी दल का प्रकोप महामारी का स्वरूप ग्रहण कर लेता है। ऐसी स्थिति में उपचार से पूर्व बचाव बेहतर है, की अवधारणा के दृष्टिगत जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश राय ने जनपद के किसानों को सलाह दिया कि वह निरंतर टिड्डी दल के आक्रमण की निगरानी करते रहें, ताकि किसी भी स्तर पर प्रकोप की दशा में ससमय टिड्डी दल पर नियंत्रण पाया जा सके। जनपद के किसानों को टिड्डी दल के प्रकोप की दशा में सुझाव एवं संस्तुतियों का अनुपालन करने का निर्देश दिया है। टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों एवं ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से जिला प्रशासन तक पहुंचायें। टिड्डी दल के प्रकोप की दशा में एक साथ इकट्ठा होकर टीन के डिब्बों, थालियों आदि को बजाते हुये शोर मचायें। शोर सुनकर टिड्डी दल आस-पास के खेतों पर आक्रमण नहीं कर पायेंगे। चूंकि बलुई मिट्टी चीटियों के प्रजनन एवं अण्डे देने के सर्वाधिक अनुकूल होता है, इसलिये टिड्डी दल के आक्रमण की सम्भावना को देखते हुये ऐसी मिट्टी वाले क्षेत्रों में जुताई करवा दें एवं जल का भरवा दें। उक्त उपाय से टिड्डियों के विकास की सम्भावना कम हो जाती है।