सांसद जौनपुर और जिलाधिकारी जौनपुर से सहायता की उम्मीद।

अनुपम पाण्डेय

कहते है न कि मौसम कोई भी आये जाए लेकिन पिसना गरीब को पड़ता है अमीरों की बला से क्या? मामला शाहगंज सोंधी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम जमदहाँ के बीबीपुर का है यहाँ सरकार और सरकारी मुलाजिमों के दावे हवा हवाई साबित हो रहें हैं। बताते चलें कि जमदहाँ गाँव का यह पुरा निषाद समुदाय बाहुल्य है लेकिन यहाँ ज्यादातर लोगों के पास न तो शौचालय है और न ही आवास लोग घास पूस के घरों में रहने को मजबूर हैं बारिश के दिनों में तो यहाँ और आफ़त होती है हर जगह से जलभराव होने का डर लगातार बना रहता है।यहीं तिरपाल के घर में रहने वाली रामकुमार की पत्नी बतातीं हैं पति ठेला चलातें हैं और एक पुत्र बिकलांग है उपर से न तो आवास मिला और न ही शौचालय इतने पर फफक कर रोने लगतीं हैं।

यहीं के रहने वाले संतलाल से जब पूछा गया तो अपना टूटा फूटा घर दिखाते हुए कहते हैं कि इसी में रह कर गुजारा कर रहा हूँ घर गिरने का भय लगातार बना रहता है शासन से न आवास मिला और न ही शौचालय।इसी प्रकार रामप्रताप, श्यामलाल, चनई, सोनई, पारस, ललई,देवराज आदि लोगों ने बताया कि उनके पास न तो शौचालय है और न ही रहने की समुचित व्यवस्था।ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि ब्लॉक से चंद किलोमीटर दूर बसा यह पुरा इतना पिछड़ा कैसे रहा?आखिर जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदारों की नज़र इन गरीबों पर क्यों नहीं पड़ी? अब अगर जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी इसे संज्ञान में ले ले तो बहुतों के घर खुशियां आ सकती है।