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जौनपुर। जनपद न्यायाधीश मदनपाल सिंह ने बताया कि संदीप जायसवाल सचिव उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ द्वारा उच्चतम न्यायालय में दाखिल रिट याचिका में कोविड-19 के छुआछूत/रोग संचार के संबंध में गठित हाई पावर समिति का प्रस्ताव एवं निर्देश प्राप्त हुआ है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित रिट में हाई पावर समिति द्वारा कोरोना वायरस कोविड 19 महामारी की वर्तमान स्थिति के संबंध में जेलों में अत्यधिक भीड़ होने की समस्या पर विचार करते हुए एवं उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार हाई पावर समितियों को कैदियों की श्रेणी जो पेरोल अथवा अनंतिम जमानत पर छोड़े जाने को निश्चित करना है। हाई पावर समिति ने बैठक में विचाराधीन कैदियों के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए है। समिति ने आगे यह भी निर्देश दिया है कि निम्नलिखित श्रेणी के विचाराधीन बंदी (विदेशी राष्ट्र के विचाराधीन बंदियों को छोड़कर) को अंतरिम जमानत पर छोड़े जाएंगे। ऐसे विचाराधीन बंदी जो ऐसे आपराधिक वादों में बंद हैं जिनमें सजा 7 वर्ष की है और वर्तमान में जेल में निरुद्ध हैं, उन्हें सत्र न्यायालय/अपर सत्र न्यायालय अथवा न्यायिक दंडाधिकारी को सम्मिलित करते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जैसे भी मामला हो, उन्हें 8 सप्ताह के लिए उनके द्वारा व्यक्तिगत बंध पत्र के साथ अंडरटेकिंग प्रस्तुत करने एवं उसमें स्वयं यह लिखते हुए कि उनके द्वारा अंतरिम जमानत का समय समाप्त होने पर न्यायालय के समक्ष आत्म समर्पण किया जाएगा, छोड़ा जाए। यदि न्यायालय कोई अन्य शर्त लागू करना चाहती है तो वह केस की परिस्थितियों को देखते हुए लगा सकती है। जेल में आवेदन पत्र प्रस्तुत करने पर सत्र न्यायालय, अपर सत्र न्यायालय अथवा न्यायिक दंडाधिकारी को सम्मिलित करते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जैसे भी मामला हो, एक दिन के अंतराल पर जेल का निरीक्षण करते हुए अंतरिम जमानत स्वीकृत की जाए तथा जमानत प्रार्थना पत्र का शीघ्र अतिशीघ्र निस्तारण किया जाए। विचाराधीन बंदी के लिए जमानत प्रार्थना पत्र के लेखन हेतु जेल के अधिकारियों/कर्मचारियों जेल पैरा लीगल वालंटियर और पैनल लॉयर जो संबंधित जिले के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल में हो, उनकी सहायता ली जाए तथा इसकी सूचना संबंधित जिले के सचिव को दी जाए। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु लॉक डाउन के समय में न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट, पैनल लॉयर को पास जिला प्रशासन द्वारा निर्गत किया जाएगा। जेल अधीक्षक विचाराधीन बंदियों द्वारा अंतरिम जमानत हेतु प्रार्थना पत्र दिए जाने पर लगातार सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संपर्क में सदैव रहेगा जिससे उचित व्यवस्था की जा सके। जेल अधीक्षक द्वारा पैरोल स्वीकृति एवं प्रस्तुत अंतरिम जमानत और एक दिन में निस्तारित जमानत प्रार्थना पत्रों की संख्या की सूचना जिलास्तरीय मानीटरिंग समिति को दूसरे दिन सूचित की जाएगी तथा उनके द्वारा जेल की ऑफिशियल वेबसाइट पर प्रसारित की जाएगी। उन्होंने उपरोक्त के संबंध में यह निर्देशित करते हुए अपेक्षा किया कि संबंधित जिले के जेल एथॉरिटीज और जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित करके हाई पावर समिति के निर्देशों का अनुपालन किया जाए। यह भी अपेक्षा किया कि पेरोल स्वीकृति एवं प्रस्तुत अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र एवं निस्तारण की संख्या जिला स्तरीय मॉनिटरिंग टीम को प्रतिदिन सूचित किया जाए। उच्चतम न्यायालय की हाई पावर समिति द्वारा दिए गए उपरोक्त निर्देशों का अनुपालन किए जाने हेतु इस जजशिप में अधिकारीगण नामित किये गये हैं जो जेल में बंद विचाराधीन बंदियों की संख्या को देखते हुए प्रार्थना पत्र का निस्तारण करेंगे जिसमें प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तृतीय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसटीसी प्रथम अंजनी कुमार, प्रभारी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास, प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तृतीय प्रथम दिन, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसटीसी प्रथम अंजनी सिंह तीसरे दिन, प्रभारी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास 5वें दिन जेल का निरीक्षण करते हुए अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्रों का निस्तारण जैसे आवश्यकता/परिस्थितियां हो, करेंगे तथा सूचना सिस्टम ऑफिसर को अपलोड कराएं जाने हेतु उपलब्ध कराएंगे। इसी प्रकार अग्रिम आदेश तक उक्त कार्यों का संपादन उनके द्वारा किया जाएगा। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देशित किया गया कि जिला प्राधिकरण में नामित पीएलवी एवं पैनल की सहायता उक्त कार्य के संपादन हेतु लिया जाना सुनिश्चित करें।




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