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बरसठी/जौनपुर। बैंकों में लगी जबरजस्त भीड़ लॉक डाउन पर भारी पड़ रही है। खातों में धनराशि को निकालने के लिए लोग बैंकों पर उमड़ पड़े है। क्षेत्र में संचालित बैंकों पर सरेआम शारीरिक दूरी के नियम दरकिनार कर दिया। हालांकि एकाध बैंकों पर पुलिस के जवान लाइनों में लगे लोगो मे परस्पर दूरी बनाने में जुटी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रो में बैंकों में तमाम आदेशों के बाद भी सामाजिक दूरी का अनुपालन नही हो पा रहा है। बैंकों में जुटने वाली भीड़ सोशल डिस्टेसिंग का पालन बिल्कुल नही कर रही है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत काशी गोमती ग्रामीण बैंक, एसबीआई, यूबीआई, सेंट्रल समेत सभी जनसेवा बैंकों में विधवा, वृद्धा, दिव्यांग पेंशन, पंजीकृत, अपंजीकृत दिहाड़ी कामगारों के खातों में एक-एक हजार रुपए की धनराशि हस्तांतरित कराए जाने के बाद लोगो की बैंकों में जबरदस्त भीड़ बढ़ी है। शुक्रवार को क्षेत्र के बसहरा में संचालित काशी गोमती बैंक में जबरजस्त भीड़ का नजारा था, सुबह 9 बजे से ही सैकड़ो की तादात में खाताधारकों की भीड़ मुख्य गेट पर एकत्र थी। जबकि पुलिस नदारत थी। ऐसा ही नजारा परियत बैंक में प्रतिदिन नजर आता हैं। इससे यह साबित होता हैं कि ग्रामीण क्षेत्रो में संचालित होने वाली संस्थाओं में किसी भी दशा में सामाजिक दूरी बनाने के आदेश का पालन नही हो पा रहा हैं। कर्मी दूरी बनाने को कहते है तो लोग झगड़ा करने पर भी उतारू हो जाते है। इनमें महिलाओ की संख्या अधिक है। बैंकों में जुटी भीड़ में अधिकांश लोग खातों में आए 500 रुपए की धनराशि निकालने आए थे। इन खाता धारकों की भीड़ लॉक डाउन के शारीरिक दूरी के नियम पर भारी पड़ी है। बता दे कि, क्षेत्र के सभी बैंकों की स्तिथि तकरीबन एक जैसे ही हैं। ऐसे में देश मे बढ़ रहे वैश्विक महामारी कोरोना से बचने का सोशल डिस्टेसिंग ही उपाय है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में सोशल डिस्टेसिंग की धज्जियां उड़ाते बेपरवाह जनता की लापरवाही से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि जल्द इसे लेकर सख़्ती नही बरती गई तो आने वाले दिनों में स्तिथि बेहद ख़राब हो सकती है।

इनपुट-चेतन सिंह